
भारत सरकार द्वारा प्रस्तावित ग्रेट निकोबार मेगा प्रोजेक्ट देश की सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक है। यह परियोजना न केवल आर्थिक विकास बल्कि सामरिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हाल ही में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) द्वारा इसे सशर्त मंजूरी दिए जाने के बाद यह फिर से चर्चा में आ गई है।
यह परियोजना विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन की एक बड़ी परीक्षा बन चुकी है, जिसमें एक ओर राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक हित हैं, तो दूसरी ओर जैव विविधता और आदिवासी समुदायों का अस्तित्व।
क्या है Great Nicobar Mega Project?
ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के सबसे दक्षिणी द्वीप “ग्रेट निकोबार” में विकसित किया जा रहा एक व्यापक बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट है। इसका उद्देश्य इस क्षेत्र को एक वैश्विक समुद्री और आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित करना है।
इस परियोजना के प्रमुख घटक हैं:
- अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल (Galathea Bay)
- डुअल-यूज (सिविल + सैन्य) एयरपोर्ट
- आधुनिक टाउनशिप
- ऊर्जा उत्पादन संयंत्र
यह परियोजना लगभग ₹81,000 करोड़ से ₹90,000 करोड़ के बीच की लागत से विकसित की जा रही है।
इसका मुख्य उद्देश्य भारत को वैश्विक समुद्री व्यापार में एक प्रमुख हब बनाना है, ताकि भारत को अन्य देशों के बंदरगाहों पर निर्भर न रहना पड़े।
Great Nicobar Mega Project के भारत के लिए आर्थिक लाभ
ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को भारत की अर्थव्यवस्था के लिए “गेम चेंजर” माना जा रहा है। इसके प्रमुख आर्थिक लाभ निम्नलिखित हैं:
- वैश्विक व्यापार केंद्र का विकास
यह द्वीप Strait of Malacca के पास स्थित है, जो दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है।
- भारत इस परियोजना के माध्यम से ट्रांसशिपमेंट हब बन सकता है
- विदेशी बंदरगाहों (जैसे सिंगापुर, कोलंबो) पर निर्भरता कम होगी
- रोजगार और निवेश
- इस परियोजना से हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार उत्पन्न होंगे
- विदेशी निवेश और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा
- पर्यटन और सेवा क्षेत्र का विस्तार
- आधुनिक टाउनशिप और पर्यटन सुविधाओं के विकास से पर्यटन उद्योग को बढ़ावा मिलेगा
- क्रूज टूरिज्म और इको-टूरिज्म की संभावनाएं बढ़ेंगी
- लॉजिस्टिक्स लागत में कमी
- भारत के निर्यात-आयात में लागत कम होगी
- सप्लाई चेन मजबूत होगी
इस प्रकार यह परियोजना भारत को वैश्विक व्यापार नेटवर्क में एक प्रमुख स्थान दिला सकती है।

Great Nicobar Mega Project का सामरिक (Strategic) महत्व
ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट का सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसका सामरिक महत्व है।
- हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की मजबूत उपस्थिति
यह परियोजना भारत की उपस्थिति को अंडमान सागर और दक्षिण-पूर्व एशिया में मजबूत करेगी।
- “अन्सिंकबल एयरक्राफ्ट कैरियर”
ग्रेट निकोबार को अक्सर भारत का “अन्सिंकबल एयरक्राफ्ट कैरियर” कहा जाता है, क्योंकि यह सैन्य दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान पर स्थित है।
- चीन की बढ़ती गतिविधियों का जवाब
- हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती मौजूदगी के बीच यह परियोजना भारत के लिए रणनीतिक संतुलन प्रदान करेगी
- समुद्री निगरानी और सुरक्षा क्षमता बढ़ेगी
- डुअल-यूज एयरपोर्ट
- नागरिक और सैन्य दोनों उद्देश्यों के लिए उपयोग
- आपातकालीन स्थितियों में तेजी से प्रतिक्रिया संभव
Great Nicobar Mega Project के पर्यावरण पर प्रभाव
जहाँ एक ओर यह परियोजना विकास का प्रतीक है, वहीं दूसरी ओर पर्यावरणीय चिंताएं भी गंभीर हैं।
- वनों की कटाई
- लगभग 9.64 लाख पेड़ों की कटाई का अनुमान है
- इससे जैव विविधता पर बड़ा असर पड़ सकता है
- जैव विविधता को खतरा
- यह क्षेत्र यूनेस्को बायोस्फीयर रिजर्व है
- दुर्लभ प्रजातियों, समुद्री जीवों और कछुओं के प्रजनन स्थल प्रभावित हो सकते हैं
- कोरल रीफ और समुद्री पारिस्थितिकी
- बंदरगाह निर्माण से कोरल रीफ को नुकसान
- समुद्री जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव
- भूकंपीय (Seismic) जोखिम
- यह क्षेत्र भूकंप संवेदनशील है
- बड़े निर्माण से जोखिम बढ़ सकता है
- आदिवासी समुदायों पर प्रभाव
- शॉम्पेन और निकोबारी जनजातियों के जीवन पर खतरा
- सांस्कृतिक पहचान और स्वास्थ्य पर असर
Great Nicobar Mega Project को NGT द्वारा मंजूरी और शर्तें
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने 2026 में इस परियोजना को मंजूरी दी, लेकिन साथ ही कई महत्वपूर्ण शर्तें भी लगाई।
NGT के प्रमुख बिंदु:
- परियोजना को “राष्ट्रीय महत्व” का बताया
- पर्यावरणीय मंजूरी में पर्याप्त सुरक्षा उपाय पाए
- हस्तक्षेप करने का कोई ठोस आधार नहीं पाया
लगाई गई प्रमुख शर्तें:
- पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों का सख्त पालन
- जैव विविधता संरक्षण योजना लागू करना
- Compensatory Afforestation (प्रतिपूरक वनीकरण)
- बायोडायवर्सिटी इम्पैक्ट असेसमेंट अनिवार्य
- आदिवासी समुदायों की सुरक्षा और अधिकार सुनिश्चित करना
- समुद्री पारिस्थितिकी की निगरानी
सरकार ने भी दावा किया है कि परियोजना में पर्यावरणीय संतुलन और जनजातीय संरक्षण को प्राथमिकता दी गई है।
Great Nicobar Mega Project के सम्बन्ध में विवाद और आलोचना
यह परियोजना लगातार विवादों में रही है:
- पर्यावरणविद इसे “इकोलॉजिकल डिजास्टर” बताते हैं
- आदिवासी अधिकारों के उल्लंघन की आशंका
- बड़े पैमाने पर प्राकृतिक संसाधनों का नुकसान
- पारदर्शिता की कमी और रिपोर्ट्स का गोपनीय होना
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन की परीक्षा है।
Great Nicobar Mega Project के सम्बन्ध में अन्य महत्वपूर्ण पहलू
- स्मार्ट सिटी विकास
- 160 वर्ग किमी में आधुनिक शहर
- 3.5 लाख तक आबादी बसाने की योजना
- राष्ट्रीय सुरक्षा और अर्थव्यवस्था का संगम
यह परियोजना भारत की “Act East Policy” को मजबूती देती है
- दीर्घकालिक दृष्टिकोण
- 2050 तक भारत को समुद्री शक्ति बनाने का लक्ष्य
- लॉजिस्टिक्स और व्यापार में आत्मनिर्भरता
ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट भारत के विकास की एक महत्वाकांक्षी कहानी है, जिसमें आर्थिक प्रगति, सामरिक मजबूती और वैश्विक पहचान की संभावनाएं निहित हैं।
लेकिन इसके साथ ही यह परियोजना एक गंभीर प्रश्न भी खड़ा करती है—क्या विकास की कीमत पर्यावरण और आदिवासी अस्तित्व के नुकसान के रूप में चुकाई जानी चाहिए?
NGT की सशर्त मंजूरी ने इस परियोजना को आगे बढ़ने का रास्ता जरूर दिया है, लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार पर्यावरणीय नियमों, पारदर्शिता और सामाजिक न्याय को कितनी गंभीरता से लागू करती है।
अंततः, ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट भारत के लिए केवल एक इंफ्रास्ट्रक्चर योजना नहीं, बल्कि “विकास बनाम पर्यावरण” की बहस का सबसे बड़ा उदाहरण बन चुका है—जहाँ संतुलन ही सफलता की कुंजी होगा।
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