Dhurandhar 2

भारतीय सिनेमा के इतिहास में समय-समय पर ऐसी फिल्में आती हैं जो मनोरंजन की परिभाषा बदल देती हैं, लेकिन रणवीर सिंह स्टारर फिल्म ‘धुरंधर 2’ ( Dhurandhar 2) ने जो कर दिखाया है, वह न केवल अद्भुत है बल्कि अकल्पनीय भी है। अपनी रिलीज के साथ ही बॉक्स ऑफिस पर सुनामी लाने वाली इस फिल्म ने सफलता के उन शिखरों को छू लिया है, जहाँ तक पहुँचना किसी भी बॉलीवुड फिल्म के लिए अब तक एक सपना था।
1000 करोड़ क्लब में शामिल होने वाली पहली बॉलीवुड फिल्म बनी Dhurandhar 2
‘धुरंधर 2’ ने बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रचते हुए एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। यह बॉलीवुड(Bollywood) की पहली ऐसी फिल्म बन गई है जिसने घरेलू बॉक्स ऑफिस पर 1000 करोड़ रुपये (Net) का जादुई आंकड़ा पार किया है। फिल्म की इस अभूतपूर्व सफलता ने पूरी फिल्म इंडस्ट्री को अचंभित कर दिया है। ‘धुरंधर 2: द रिवेंज’ ने साबित कर दिया है कि यदि कंटेंट दमदार हो और अभिनय में जान हो, तो दर्शक उसे सर-आंखों पर बैठाते हैं।
बाहुबली 2 का रिकॉर्ड ध्वस्त करने के करीब है Dhurandhar 2
फिल्म की रफ्तार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह निर्देशक एसएस राजामौली की ‘बाहुबली 2’ के रिकॉर्ड को तोड़ने के बेहद करीब पहुंच गई है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, ‘धुरंधर 2’ प्रभास की ‘बाहुबली 2’ के लाइफटाइम कलेक्शन को पछाड़ने से महज 7 करोड़ रुपये दूर है। जिस गति से फिल्म अभी भी सिनेमाघरों में दौड़ रही है, उसे देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि अगले कुछ दिनों में यह भारत की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बन जाएगी।
दुनिया भर में Dhurandhar 2 का जलवा
फिल्म की सफलता केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्लोबल लेवल पर भी इसने झंडे गाड़े हैं। ‘धुरंधर 2’ के लिए दुनिया भर में लगभग 4,96,779 शो चलाए गए, जो अपने आप में एक बहुत बड़ा आंकड़ा है।

वर्ल्डवाइड बॉक्स ऑफिस पर फिल्म की पकड़ इतनी मजबूत है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी यह फिल्म नए बेंचमार्क सेट कर रही है।
Dhurandhar 2 पर निर्देशक का दृषिटकोण
फिल्म ‘धुरंधर 2’ में निर्देशक का दृष्टिकोण केवल एक एक्शन फिल्म बनाने तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने सिनेमा के माध्यम से ‘राष्ट्रवाद’ और ‘नागरिक कर्तव्य’ की एक नई परिभाषा पेश करने की कोशिश की है। निर्देशक ने फिल्म में भारत को एक उभरती हुई वैश्विक शक्ति के रूप में चित्रित किया है। उन्होंने यह दिखाने का प्रयास किया है कि आज का भारत अपनी रक्षा करने में सक्षम है और तकनीक से लेकर रणनीति तक, हम किसी से पीछे नहीं हैं। फिल्म के विजुअल्स में आधुनिक बुनियादी ढांचे और तकनीकी प्रगति को प्रमुखता दी गई है।देश को केवल बाहरी दुश्मनों से ही नहीं, बल्कि भीतर की खामियों से भी लड़ने की जरूरत है।
उनका विजन यह स्पष्ट करता है कि एक सच्चा ‘धुरंधर’ वह नहीं है जो केवल हथियार उठाए, बल्कि वह है जो व्यवस्था के भीतर रहकर ईमानदारी से बदलाव लाने का साहस रखे। फिल्म में विभिन्न क्षेत्रों और संस्कृतियों के पात्रों को एक साझा उद्देश्य के लिए एकजुट होते दिखाया गया है। निर्देशक ने इसके जरिए यह संदेश दिया है कि जब देश की सुरक्षा और सम्मान की बात आती है, तो आंतरिक मतभेदों को भुलाकर ‘भारतीय’ होना ही सबसे बड़ी पहचान है। संक्षेप में, निर्देशक का दृष्टिकोण एक ऐसे ‘सशक्त और स्वाभिमानी भारत’ का निर्माण करना था, जहाँ हर नागरिक अपने भीतर के ‘धुरंधर’ को पहचान सके और देश की प्रगति में योगदान दे सके।
Dhurandhar 2 केवल एक फिल्म नहीं, सीमा पार छिपे देश के दुश्मनों के लिए एक चेतावनी है
फिल्म ‘धुरंधर 2: द रिवेंज’ की कहानी वहीं से शुरू होती है जहाँ पहला भाग समाप्त हुआ था, लेकिन इस बार कैनवास और भी बड़ा और अधिक भावनात्मक है। सिनेमा अक्सर कल्पना की उड़ान भरता है, लेकिन जब आदित्य धर जैसे निर्देशक और रणवीर सिंह जैसे कलाकार पर्दे पर उतरते हैं, तो वह कल्पना नहीं, बल्कि एक कड़वा सच बन जाती है। फिल्म ‘धुरंधर 2: द रिवेंज’ महज़ एक जासूसी थ्रिलर नहीं है; यह उस ‘नए भारत’ की गर्जना है जो अब अपनी सुरक्षा के लिए किसी अनुमति का इंतज़ार नहीं करता।
दुश्मन के घर में घुसकर हिसाब
फिल्म की कहानी वहीं से शुरू होती है जहाँ एक सच्चे देशभक्त का मिशन शुरू होता है। रणवीर सिंह(Ranveer Singh) द्वारा निभाया गया जसकीरत सिंह रंगी (उर्फ हमजा अली मजारी)

का किरदार उस अदृश्य दीवार की तरह है, जो हमारे देश और बाहरी खतरों के बीच खड़ी है। कराची की गलियों में एक गैंगस्टर बनकर घुसना और पाकिस्तान (Pakistan) की सत्ता के गलियारों तक अपनी पहुँच बनाना कोई खेल नहीं है। यह फिल्म बखूबी दिखाती है कि एक जासूस के लिए ‘देश’ ही उसका एकमात्र परिवार और ‘मिशन’ ही उसका एकमात्र धर्म होता है।
एक जासूस की आँखों से Dhurandhar 2 के मुख्य बिंदु
26/11 का प्रतिशोध: यह फिल्म उन जख्मों को कुरेदती है जो 2008 में मुंबई को दिए गए थे। जब जसकीरत ‘बड़े साहब’ और मेजर इकबाल (Arjun Rampal) जैसे किरदारों के सामने खड़ा होता है, तो वह हर उस भारतीय की आवाज़ बन जाता है जिसने अपनों को खोया है।

आर. माधवन का अजय सन्याल (NSA Ajeet Doval पर आधारित) के रूप में चित्रण शानदार है। यह दिखाता है कि एक सफल ऑपरेशन के पीछे केवल गोलियां नहीं, बल्कि एक तेज़ दिमाग और ठंडी योजना होती है।
Dhurandhar 2 राष्ट्रवाद या वास्तविकता?
आलोचक इसे ‘प्रोपेगेंडा’ कह सकते हैं, लेकिन हम जैसे लोग जो सरहदों की खामोशी और वहां की आहटों को समझते हैं, उनके लिए यह वास्तविकता के करीब है। जब फिल्म में मेजर इकबाल और हमजा के बीच का अंतिम मुकाबला होता है, तो वह केवल दो लोगों की लड़ाई नहीं, बल्कि न्याय और आतंक के बीच का संघर्ष है।
’धुरंधर 2′ हमें याद दिलाती है कि हम आपने देश में सुकून की नींद इसलिये ले पाते है क्योंकि कई ‘जसकीरत’ जैसे देश भक्त अपनी पहचान मिटाकर दुश्मन के बीच बैठकर देश की सुरक्षा के लिये परम बलिदान दे रहे है। ”हम इतिहास पढ़ते नहीं हैं, हम इतिहास लिखते हैं।” – यह संवाद फिल्म की आत्मा है और हर उस गुमनाम जासूस को समर्पित है जिसकी वर्दी पर कोई पदक नहीं होता, पर जिसके दिल में सिर्फ हिंदुस्तान (India)होता है।
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